नेचुरोपैथी ही प्राकृतिक जीवन की ओर ले जा सकती है

आज के इस आधुनिक युग मे प्राकृतिक चिकित्सा ही हमें प्राकृतिक जीवन की ओर ले जा सकती है।

मनुष्य प्रकृति का हिस्सा है और प्रकृति स्वयं अपना तथा जीवधारियों का पोषण करती है। प्राकृतिक जीवन चिकित्सा विज्ञान का ही विस्तृत रूप होता है। प्राकृतिक चिकित्सा रोगों के इलाज का ही तरीका नहीं है अपितु जीवन जीने की सही पद्धति है अर्थात यह चिकित्सा पद्धति हमे यह बताती है कि हमें कैसे अपना जीवन जीना चाहिए।

शरीर के पोषण और पुष्टि के लिए आकाश, अग्नि, जल,वायु, पृथ्वी नामक प्राकृतिक साधनों का सहारा लेने की ओर ही प्राकृतिक चिकित्सा का ध्यान ज्यादा है। यह बताती है कि रोग स्वास्थ्य संबंधी नियमों के उल्लंघन का ही परिणाम होते हैं।

रोगों की सर्वोत्तम चिकित्सा प्रणाली

अतः प्राकृतिक चिकित्सा एक धर्म प्रणाली है जिस पर चलने से सच्चे और स्थाई स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। रोगों की सर्वोत्तम चिकित्सा प्रणाली वह है जो जो रोगों का पूरी तरह नाश करे और शरीर को पूरी तरह स्वस्थ करे।

प्राकृतिक चिकित्सा में रोग के मूल कारण को बाहर करके रोगी का शरीर स्वस्थ एवं निर्बल बनता है। इस चिकित्सा प्रणाली के द्वारा रोगी को आवश्यक तत्वों की उपलब्धि होती है जिनसे वह मजबूत बनता है और उसका तन और मन को स्वस्थ बनता है।

रोगी के लिए एक जीवन पद्धति का आरंभ

प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से रोग मिट जाने के साथ ही रोगी के लिए एक जीवन पद्धति का आरंभ होता है। जिसमें रोग के आगमन की कोई गुंजाइश नहीं रहती है। पहले मनुष्य प्राकृतिक तरीके से जीवन को बिताता था तो उसे किसी प्रकार की चिकित्सा की आवश्यकता नहीं रहती थी और वह पूर्ण स्वस्थ रहता था।

अनेक चिकित्सा पद्धतियों में प्राकृतिक चिकित्सा का प्रथम स्थान

नेचुरोपैथी प्राकृतिक जीवन जीने की पद्धति है। जब हमारे शुद्ध शरीर में अशुद्ध तत्व का प्रवेश होता है तभी शुद्ध शरीर अशुद्ध शरीर में बदलकर रोग उत्पन्न होता है। अतः हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि रोग अशुद्धता है व स्वास्थ्य शुद्धता है। अतः रोग का कोई अस्तित्व नही है, रोग को आसानी से दूर किया जा सकता है। साथ ही खोए हुए स्वास्थ्य को प्राप्त कर भविष्य में भी स्वास्थ्य कायम किया जा सकता है।

रोग को जड़ को दूर किया जाता है

प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा रोग के कारण एवं रोग के जड़ को दूर किया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा एवं जीवन का एक निश्चित नियम व सिद्धांत है। प्राकृतिक चिकित्सा का मुख्य उद्देश तन मन में एकरूपता स्थापित कर स्वास्थ्य प्राप्त करना है। प्राकृतिक चिकित्सा एवं आहार का प्रत्येक अंग पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस चिकित्सा को अपनाने से शरीर ठीक कार्य करता है।

प्राकृतिक चिकित्सा प्राकृतिक आहार, नित्य व्यायाम, शारीरिक आंतरिक व बाह्य सफाई पर ही निर्भर है। यदि हम प्राकृतिक जीवन जीते हैं तो हमें किसी रोग की आशंका नहीं रहती और यदि किसी रोग की प्राकृतिक चिकित्सा करते हैं तो स्वतः ही प्राकृतिक जीवन की ओर अग्रसर हो जाते हैं । अतः प्राकृतिक चिकित्सा ही आज के युग में व्यक्ति को प्राकृतिक जीवन की ओर ले जा सकती है इसमें किसी प्रकार का कोई संशय व्यक्त नहीं किया जा सकता।

आधुनिक युग में पैदा हो गए हैं अनेक प्रकार के रोग

आज के इस आधुनिक युग में अनेक प्रकार के रोग पैदा हो गए हैं और मनुष्य की इम्युनिटी पावर बहुत ज्यादा घट गई है जिसकी वजह से व्यक्ति शीघ्र ही रोग की चपेट में आ जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा व्यक्ति की इम्यूनिटी पावर को और अधिक बढ़ा देती है जिसकी वजह से व्यक्ति को रोग आसानी से नहीं पकड़ पाते। प्राकृतिक चिकित्सा संपूर्ण शरीर को स्वस्थ कर उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है इसलिए आज के युग में व्यक्ति को प्राकृतिक चिकित्सा के हमेशा संपर्क में रहना चाहिये।

महामारी का रूप लेते चले जा रहे हैं रोग

आज के समय में अधिकांश रोग जो कि एक महामारी का रूप लेते चले जा रहे हैं जैसे कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापा, थायराइड, त्वचा के रोग आदि इन सब में प्राकृतिक चिकित्सा एक रामबाण की तरह काम करती और स्थाई समाधान देती है। अतः इसमें कोई शक नहीं है कि प्राकृतिक चिकित्सा ही हमें प्राकृतिक जीवन की ओर ले जा सकती है।