मालिश क्या है, फायदे और किस प्रकार करनी चाहिए

मालिश का अर्थ है अशुद्ध रक्त बहाने में नाड़ियों की मदद करना। जब हमारा शरीर किसी भी कारण से थक जाता है तो रक्त को शुद्ध करने का काम करने वाली नाड़ियो का कार्य मंद हो जाता है। उनकी स्वाभाविक गति में अंतर पड़ जाता है।

रक्त वाहिनी नाडियों में कमजोरी होने से एक प्रकार जहरीला वातावरण बन जाता है।अतः यह आवश्यक है कि मालिश द्वारा अशुद्ध रक्त वाहिनी नाडियों में सहायता पहुंचाई जाए। इससे हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने में सहायता मिलती है इस सहायक कार्य को ही मालिश कहते हैं।

मालिश करने के लाभ

मनुष्य को बचपन से ही मालिश की आवश्यकता रहती है रोजाना मालिश करने से, जो आप मेहनत करते हो, उसकी थकान महसूस नहीं होती।

व्यक्ति सहनशील और शुद्ध बनता है। व्यक्ति का शरीर पुष्ट और मजबूत बनाता है। इससे शरीर को स्फूर्ति एवं दीर्घायु प्राप्त होती है।

शरीर में रक्त संचार तेज हो जाता है। त्वचा पर चमक आती है और त्वचा कोमल हो जाती है। जो व्यक्ति मालिश करता रहता है उसको कभी स्ट्रोक नहीं आता है।

मालिश करने वाला कैसा होना चाहिए

यदि आप किसी दूसरे व्यक्ति से मालिश करवा रहे हैं तो वह व्यक्ति अपना प्रेमी जन होना चाहिए।

मालिश करने वाले के हाथ नरम होने चाहिए। मालिश करने वाले व्यक्ति को स्वस्थ होना चाहिए।

उसे कोई बीमारी है तो उससे मालिश नही करानी चाहिए। एक व्यक्ति की मालिश करने के बाद दूसरे व्यक्ति की मालिश उन्ही हाथों से नहीं करनी चाहिए, साबुन से हाथ धोने चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर में मालिश

उच्च रक्तचाप के रोगी को मालिश नहीं करवानी चाहिए। मालिश करवाने के बाद शवासन में कुछ देर लेटना चाहिए। मालिश हफ्ते में एक बार करवानी चाहिए।

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