नई सभ्यता की देन है कैंसर घटने के बजाय बढ़ता जा रहा है

कैंसर आज से 100 साल पहले ना के बराबर दिखाई पड़ता था आज के आधुनिक युग में आधुनिक साधनों के बावजूद कैंसर घटने के बजाय बढ़ता जा रहा है

अमेरिका की कैंसर सोसायटी द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार 50 से 70 वर्ष की आयु वाले 3 व्यक्तियों में से एक व्यक्ति कैंसर रोग का शिकार होता है। भारत में भी कैंसर रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर जवाला के अनुसार भविष्य में 8 व्यक्तियों में एक व्यक्ति कैंसर का रोगी होगा। कैंसर अभी भी चिकित्सा विज्ञान की प्रमुख चुनौतियों में से एक है।

जानते हैं आइए कैंसर क्या होता है

कैंसर या गांठ के रूप में कभी चर्म के ऊपरी भाग के निकट कभी शरीर के भीतरी अंगों में यह प्रकट होता है शरीर के जिस स्थान पर विजातीय द्रव्य ज्यादा इकट्ठे हो जाते हैं वहां पर एक गांठ बन जाती है यह गांठ कैंसर के तत्वों का एक पूरा किला होती है । इस रोग का उत्पादक तत्व हमारे खाद्य और पेय पदार्थों के साथ मिलकर ही शरीर में प्रवेश करता है और रोग का कारण बनता है। कैंसर शोधकर्ताओं का मानना है 70 परसेंट कैंसर के रोगियों का कारण उनकी जीवन शैली है

कैंसर रोग के कारण

इस दिशा में अब तक के अनुसंधान से कैंसर रोग के 300 से अधिक कारण प्रकाश में आए हैं जिनमें से कुछ प्रमुख कारण मैं आपको बता रहा हूं। खाने पीने की चीजों को विविध प्रकार से रंगों से रंगना, खाने-पीने की चीजों को जायकेदार बनाने के लिए तीव्र गुण वाले मसालों का प्रयोग करना, खाने पीने की चीजों को खुशबूदार बनाने के लिए तीव्र खुशबूदार रसायनों का प्रयोग करना, अत्यंत गर्म खाद्य खाना, अधिक खाना, ज्यादा मास मीट खाना, प्राकृतिक भोजन न करना और गलत रहन-सहन के कारण रक्त विषाक्त होने से शरीर में कैंसर की उत्पत्ति होती है।

कम पानी पीना भी एक प्रमुख कारण है। चाय तंबाकू, शराब आदि नशीली चीजों का सेवन, सफेद चीनी एवं सेक्रीन का प्रयोग, पैक्ड फ़ूड तरह तरह से तैयार किए हुए पदार्थों में बंद करके आते हैं इन सब के कारण मनुष्य शरीर में मेटाबॉलिज्म के कुछ रासायनिक क्रियाएं होती हैं जिससे भयंकर विष की उत्पत्ति होती है यही विष कैंसर रोग का मूल कारण है।

मल का अवरोध अर्थात मल को रोक कर रखना, तीव्र रोगों में एलोपैथिक औषधियों का प्रयोग, ऑपरेशन के बाद घाव का बहुत दिनों तक ना भरना, प्लास्टिक का अत्यधिक प्रयोग, गर्भधारण व गर्भनिरोधक औषधियों का उपयोग, वायु जल आकाश पृथ्वी का प्रदूषण मानसिक तनाव व चिंता, इच्छा भावना का दमन व्यायाम न करना जैसे अनेक कारण कैंसर के जनक हैं। लंबे समय तक कब्जी रहने, आंत के कैंसर को बुलावा देने वाला होता है

इसके अलावा कच्ची सब्जियों, फलों का उपयोग न करना जिस कारण विटामिंस खनिज लवण की प्राप्ति नहीं होती, परिश्रम ना करना, नमक व चीनी का अत्यधिक उपयोग करना,

रासायनिक पदार्थ के कारण हमारे सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ दूषित हो गए हैं। पानी में फ्लोराइड क्लोरीन होने के कारण कैंसर रोग की उत्पत्ति एवं विकास में सहायक होता है। भारत में मुंह का कैंसर मैनपुरी, एटा, फर्रुखाबाद, इटावा कानपुर आदि जनपदों में सर्वाधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट से यह तथ्य जन मानस पटल पर उभर कर सामने आया है कि मैनपुरी तथा कपूरी में तमाखू का अधिक मात्रा में सेवन करने से मुंह का कैंसर पीड़ित रोगी इन जनपदों में है

बिहार के ग्रामीण इलाकों में भी मुंह के कैंसर के रोगी ज्यादा है वहां के लोग चुने के साथ तमाकू मिलाकर खाते हैं या मुंह के किसी हिस्से में दवाए रखते हैं इस प्रकार भारत में तंबाकू खाने से मुंह का कैंसर हो जाने के कारण प्रतिवर्ष लगभग 600000 लोग मुंह के कैंसर से मर जाते हैं।

भारत में स्त्रियों में कैंसर

स्त्रियों में स्तन, गर्भाशय और योनि तथा आंतों में यह रोग विशेष रूप से होता है। भारत में स्त्रियों में गर्भाशय का कैंसर खूब होताहै । इसके दो कारण हैं एक तो देहातों में माहवारी के दौरान महिलाएं पर्याप्त सफाई नहीं करती। दूसरे ज्यादा बच्चे होने से गर्भाशय ग्रीवा के घाव हो जाते हैं जिनसे बार-बार न भरने से गर्भाशय का कैंसर होता है।

कैंसर के लक्षण पुरुषों में होठ, जीभ, गला आमाशय तथा आंत आदि मुख्य रूप से इस रोग के क्षेत्र होते हैं जो अधिक धूम्रपान के आदी होते हैं उनके जीभ , फेफड़े में कैंसर, हुआ करता है। मुंह में छाले पड़ जाए तो शीघ्र ठीक नहीं होते कैंसर का रोगी शीघ्र सूखने लगता है

कैंसर बचाव के लिए प्राकृतिक जीवन जीना चाहिए। शक्ति के अनुसार कोई हल्का व्यायाम करना चाहिए। चार-पांच किलोमीटर तक वाकिंग करनी चाहिए और योगासन आदि करना चाहिए। शरीर में कब्ज न रहने दें। पैक्ड फूड और प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए सोएं। और प्रतिदिन शौचादि से निवृत होकर कुछ व्यायाम अवश्य करें। जीवन को अनुशासित करें।