जानिए अर्थराइटिस या गठिया रोग क्या होता है।

मांसपेशियों में भी दर्द बना रहता है शरीर में टूटन सी महसूस होती है शरीर के तमाम जोड़ों में इतना दर्द होता है कि चलने उठने बैठने सोने में विशेष पीड़ा होती है।

सरल शब्दों में कहें तो अर्थराइटिस या गठिया का मतलब होता है जोड़ों के दर्द और शरीर में अकड़न की बीमारी। यह 100 से अधिक विभिन्न प्रकार की गठिया की बीमारी होती है और यह बीमारी कोई एक दिन में नहीं होती यह धीरे-धीरे शरीर में विकसित होती है।

इस रोग में पूरे शरीर में अकड़न आती है और जोड़ो में दर्द रहता है। कुछ कुछ लोगों की स्थिति तो ऐसी हो जाती है कि उन्हें उठना भी मुश्किल पड़ जाता है यह शरीर के विभिन्न अंगों को भी प्रभावित करती है।

जब इसके लक्षण शरीर में आने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि अब हमें उन कारणों को त्याग देना है जो गठिया होने के लिए जिम्मेदार हैं।

अन्यथा यह रोग अन्य कई प्रकार के घातक रोगों को भी जन्म दे देता है। जब आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर इस रोग का प्रभाव होने लगता है तो इसे रूमेटाइड अर्थराइटिस कहते हैं।

यह समस्या 40 साल के बाद की उम्र के लोगों में ही दिखाई पड़ती थी लेकिन आजकल की खराब लाइफस्टाइल के कारण यह समस्या अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है।

पहले जोड़ों के दर्द को बुढ़ापे की निशानी माना जाता था लेकिन अब युवाओं में भी जोड़ों का दर्द आसानी से देखा जा सकता है। देश में इस प्रकार के लोगों की संख्या बढ़ती चली जा रही है।

अर्थराइटिस या गठिया रोग 45 से 50 साल की उम्र के महिलाओं में मीनोपॉज होने के बाद दिखाई देता है क्योंकि उस समय पर एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के चलते हैं महिलाओं में कई हार्मोन में परिवर्तन होता है।

यदि इस बीमारी को हो समय रहते इलाज न किया जाए या इसमें लापरवाही बरती जाए तो आगे चलकर इसके गंभीर परिणाम नजर आते हैं। जैसे जोड़ों के कार्टिलेज का घिस जाना। उनमें चिकनाई बिल्कुल कम हो जाना, जोड़ों में टेढ़ापन आ जाना, सूजन आ जाना और जोडों में जलन जैसी समस्याएं होना।

गठिया की शुरुआत अक्सर सबसे पहले अक्सर पैरों में दिखाई पड़ती है जैसे अंगूठे या घुटनों में दर्द या सूजन से होती है। कमर में अकड़न या मांसपेशियों में खिंचाव भी इसके शुरुआती लक्षण हैं।

इस रोग में पाचन क्रिया का बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि पाचन क्रिया को ठीक रखना बहुत ही आवश्यक है।

पाचन क्रिया के दौरान यदि यूरिक एसिड की मात्रा अधिक बन रही है तो यह आपके जोड़ों के दर्द के लिए बहुत ही ज्यादा नुकसानदायक है और जब हमारी किडनी जो उस यूरिक एसिड को बाहर निकालती है वह धीरे-धीरे अक्षम हो जाती है।

यह यूरिक एसिड हमारे शरीर में ही जमा होने लगता है और जोड़ों में दर्द पैदा करता है साथ ही किडनी को ख़राब करता है।

एक समय ऐसा आ जाता है जब किडनी काम करना बंद कर देती है और शरीर भारी भारी सा और सूजन भरा हो जाता है। धीरे धीरे एक स्थिति ऐसी आ जाती है कि फिर का पूरा शरीर ही प्रभावित हो जाता है।

अर्थराइटिस या गठिया के लक्षण

इसका सबसे प्रमुख लक्षण है जोड़ों में दर्द होना और मांसपेशियों में खिंचाव रहना, जोड़ों में सूजन आ जाना।

शरीर में अकड़न रहना, सुबह सुबह के समय पर शरीर में विशेष अकड़न रहना और उन्हें नॉर्मल होने में 20-25 मिनट का समय लग जाना।

जोड़ों में लचीलापन की विशेष कमी आ जाना, जोड़ों में विकृति आ जाना, जोड़ों के आस-पास गर्म गर्म सा महसूस होना, शरीर में थकान रहना, जोड़ों में कट कट की आवाज आना, किनारे पर खुजली बनी रहना आंखों में कीचड़ आना भूख कम लगे ना किडनी को ठीक प्रकार से काम ना करना।

इसमें मरीज को अक्सर बुखार भी आता रहता है। मांसपेशियों में भी दर्द बना रहता है। शरीर में टूटन सी महसूस होती है।

शरीर के तमाम जोड़ों में इतना दर्द होता है कि चलने उठने बैठने सोने में विशेष पीड़ा होती है। जोड़ों के आसपास गांठ जैसी भी उभर आती हैं।

अर्थराइटिस या गठिया होने के कारण

इसका सबसे प्रमुख कारण है नियमित रूप से व्यायाम न करना और संतुलित भोजन का ना लेना और गलत खानपान को अपनाना अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना , मांसाहार और शराब का सेवन करना। यूरिक एसिड का बढ़ जाना।

अर्थराइटिस या गठिया का इलाज के लिए रोगी को क्या करना चाहिए

सबसे पहले कब्ज को दूर करना चाहिए। इसके लिए यदि कुछ दिनों तक एनिमा लिया जाए तो अच्छा है।

इसके उपचार के लिए उपवास, रसाआहार, फलाहार करना चाहिए। सुबह के नाश्ता में फल और कच्ची सब्जियों का प्रयोग करना। भोजन आदि के नियमों को कड़ाई से पालन करना चाहिए।

यूरिक एसिड की चीजें नहीं खानी चाहिए। यूरिक एसिड को बढ़ाने में मसालेदार भोजन का और शराब का बहुत बड़ा योगदान है।

अर्थराइटिस के रोगी को दाल, पनीर, टमाटर, मांसाहार, शराब और खट्टी चीजें का सेवन नहीं करना चाहिए।

इस रोग में प्रतिदिन नंगे बदन को या बहुत कम कपड़ों में शरीर को धूप लगानी चाहिए। भाप स्नान और शरीर की मालिश गठिया के रोग में काफी हद तक लाभदायक होते हैं।

गठिया वाले रोगी को सुबह-शाम गर्म पानी में नींबू का रस निचोड़ कर पीना चाहिए। यदि आप मोटापे से ग्रस्त हैं तो वजन कम करना है।

अर्थराइटिस या गठिया के रोगी को अपने भोजन में गेहूं के दाने के बराबर चूना मिलाकर खाना चाहिए। ये वही चूना है जो पान की दुकान पर मिलता है। मात्रा आपको याद रखनी है कि गेहूं के दाने के बराबर दाल, सब्जी में मिलाकर प्रतिदिन दोपहर के भोजन में लेते रहे तो इसके आश्चर्यजनक परिणाम आपको दिखाई पड़ेंगे।