ठोस पदार्थों को पीना और तरल पदार्थों को खाना चाहिए।

ठोस पदार्थों को कैसे पीना है

ठोस पदार्थों को पीने से तात्पर्य है भोजन को उतना ही चबाया जाए कि वह इतना बारीक हो जाएगी जिसमें लार मिलकर पतला पतला पानी जैसा लगे। प्राकृतिक चिकित्सा ही क्या आयुर्वेद तथा आधुनिक एलोपैथी में भी भोजन को खूब चबा चबाकर खाने को कहा जाता है। भोजन को खूब चबा चबाकर खाने से जो भी पाचक एंजाइम हमारे लार में मिलते हैं वह भोजन में मिलकर पचाने का कार्य मुख से ही शुरु कर देते हैं। उनकी आवश्यकता आमाशय को होती है।

इस प्रकार लार नामक स्राव में उपस्थित टायलिन नामक एंजाइम कार्बोहाइड्रेट को पचाना शुरू कर देता है और भोजन की प्रक्रिया जो आमाशय में शुरू होनी चाहिए थी, चबाकर तरल बना लेने से मुख से ही शुरू हो जाती है।

रोटी पर घी लगाकर खाना ठीक नहीं है ऐसा इसलिए कि घी में वसा होता है जिसको पचाने के लिए मुख में जो एंजाइम कार्बोहाइड्रेट को पचाते हैं वह कार्बोहाइड्रेट तक घी के कारण नहीं पहुंचते और भोजन का कार्बोहाइड्रेट बिना टाइलिन लिए ही आमाशय में पहुंच जाता है। अमाशय को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है

भोजन को चबा चबा कर तरल बना लेने से आमाशय में पचाने में कोई कठिनाई पैदा नहीं होती। इसलिए प्राकृतिक चिकित्सा भोजन को चबा चबा कर खाने का प्रावधान है क्योंकि भोजन को बिना चबाए ठोस रूप से निगलने से वायु भी भोजन के बीच में जाकर आमाशय में एकत्रित हो जाती है जिससे आमाशय और आंतों के विकार पैदा होते हैं।

तरल पदार्थों को कैसे खाना है

तरल पदार्थों को खाने से तात्पर्य के जलीय भोजन इत्यादि तथा जल को धीरे धीरे चुस्की लेकर पीना चाहिए यानी कि जैसे कोई अगर आप जूस पी रहे हैं तो वह भी आपको शिप कर करके पीना चाहिए।

इससे सबसे पहले यह लाभ होता है कि मुख में जो लार होती है वह उस तरल पदार्थ में आसानी से मिल मिल कर चली जाती है। जो पचने में बहुत ज्यादा सहायक होती है।

दूसरा लाभ यह है कि आमाशय में तरल भोजन पहुंचकर पाचन प्रक्रिया सुचारू रूप से होती है तीसरा लाभ यह है कि जैसे ही जलीय भोजन पाचन प्रणाली में पहुंच जाता है उसका अवशोषण भी उसी तरह होता रहता है। इस प्रकार आमाशय और आंतो पर इसका अतिरिक्त भार नहीं रहता

इस प्रकार पूरे लेख का सार यही है कि जो भी आप ठोस पदार्थ भोजन के रूप में लेते हैं, उनको अच्छी तरह चबा चबा करके खाएं और जो आप तरल पदार्थ भोजन के रूप में लेते हैं, उनको आप धीरे-धीरे शिप करके आराम आराम से पीएं।

जैसे आप पानी पी रहे हैं तो उसको घूंट घूंट करके आराम आराम से पीजिए। ऐसा नहीं करना है कि एक झटके में पूरा पानी अंदर। ऐसे ही यदि आप कोई जूस पी रहे हैं तो उसको शिप कर कर के अर्थात घूंट घूंट करके ही पीना चाहिए।

यह सब स्वास्थ्य लाभ के नियम हैं। इसलिए इनको अपने जीवन में आदत में ले लेना चाहिए। इनके परिणाम आपको दूरगामी दिखाई पड़ेंगे। कोई भी रोग 1 दिन में नहीं आता है। वह आपके लंबे समय की गलत आदतों, गलत खानपान के कारण ही आता है। इसलिए छोटी-छोटी बातों को अपनी आदतों में डालें।