कोई रोग एक दिन में पैदा नही होता

कोई रोग 1 दिन में पैदा नहीं होता यह हमारे बहुत लंबे समय की लापरवाही के कारण होता है। जब हमारा शरीर उस लापरवाही को बर्दाश्त करने की क्षमता से बाहर हो जाता है तो वह रोग के रूप में प्रकट होकर सामने आ जाता है।

उदाहरण के लिए

यदि हम शराब पीते हैं तो 1 दिन के शराब पीने से हमारा कुछ खास नुकसान होने वाला नहीं है। यदि हम उस शराब को काफी लंबे समय तक पीते रहेंगे तो वह धीरे धीरे करके हमारे शरीर के अंगों को कमजोर बनाती चली जाएगी।

शरीर कमजोर 1 दिन में नहीं होता

इसी प्रकार यदि हम कोई शारीरिक व्यायाम नहीं करते तो धीरे-धीरे हमारे शरीर के अंग कमजोर होने लगते हैं। क्योंकि उनसे कोई शारीरिक श्रम नहीं कराया जा रहा है, जिसकी वजह से वह धीरे धीरे अपनी कार्यक्षमता को खो रहे हैं। और एक स्थिति ऐसी आ जाती है कि वे अंग ठीक तरह से काम करना बंद कर देते हैं।

तब शरीर कह देता है मेरे बस का नहीं है

यदि हम बहुत ज्यादा तले हुए पूडी पकवान, अधिक मिर्च मसाले या पिज्जा बर्गर, जंक फूड, पैक्ड फूड लंबे समय तक लगातार खाते रहते हैं तो धीरे-धीरे उनका प्रभाव हमारे शरीर पर आता चला जाता है। शुरुआत में हमें पता नहीं चलता लेकिन धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हो जाती है शरीर हमारा कह देता है कि मेरे बस का नहीं है। तो उस स्थिति में जो रोग उत्पन्न होते हैं वह उसी 1 दिन के नहीं है वह काफी लंबे समय की लापरवाही के हैं।

यदि कब्ज हो जाती है तो यह समझे कि आप काफी लंबे समय से प्राकृतिक भोजन का उपयोग नहीं कर रहे हैं। खान पान कर के नियमों का पालन नही कर रहे हों।

1 दिन में नहीं बढ़ता मोटापा

आपको मोटापा बढ़ जाता है तो आप समझ लीजिए या 1 दिन में नहीं बढ़ रहा है। यह धीरे-धीरे बढ़ रहा है। आपको यह पता भी होता है  कि हम धीरे-धीरे मोटे होते चले जा रहे हैं। पर एक स्थिति ऐसी आ जाती है कि मोटापा इतना बढ़ जाता है कि उसके कारण चलना भी मुश्किल हो जाता है। डाइबिटीज, बीपी जैसे अनेक रोग तब हमें घेर लेते हैं और जीवन नरक बन जाता है।

हमें दिन प्रति दिन के अभ्यास में इन सब बातों को लाना होगा। इसीलिए स्वास्थ्य नियमों के पालन की बात कही जाती है। नियमों का पालन करते रहते हैं तो हमें उस तरह के रोग नहीं होते। इसलिए कोई भी रोग 1 दिन में उत्पन्न नही होता है।

कुछ लोग कभी बीमार क्यों नहीं होते

आपने देखा होगा कि अनेक लोग कभी बीमार नहीं होते ना ही उन पर किसी मौसम का प्रभाव होता है और ना ही उनके ऊपर किसी रोग का आक्रमण होता है। उसके पीछे कारण यही है कि उन्होंने अपने स्वास्थ्य के नियम कुछ ऐसे बना रखे हैं, जिनकी वजह से उनका स्वास्थ्य सही बना रहता है।

मन के गुलाम ना बने मन को गुलाम बनाएं

जब हम इस प्रकार की दिनचर्या अपना लेते हैं जब मन आया सोलिए, जब मन आया खा लिया, कुछ भी खा लिया अर्थात हम इस शरीर को मन के अनुसार चलाते रहते हैं तो निश्चित रूप से परेशानियां खड़े होने वाली है।

हमेशा खाने से पहले यह सोचना चाहिए कि यह हमें खाना चाहिए या नहीं, इसी प्रकार हमें बोलने से पहले यह सोचना चाहिए कि हमें यह बोलना चाहिए या नहीं।

अंत में सब बातों का सार यही है कि हमें भी कुछ इस प्रकार के नियमों को बनाना होगा जिससे हम स्वस्थ बने रहें और मस्त रहें और हमारे ऊपर किसी रोग का आक्रमण न हो।