जानिए उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) क्या है।

इस उच्च रक्तचाप को हाइपरटेंशन भी कहते हैं। हमें जीवित रखने के लिए रक्त हमारे शरीर के प्रत्येक भाग में धमनियों द्वारा निरंतर पहुंच कर उसे पोषण देता रहता है। यह अत्यंत आवश्यक कार्य हमारे ह्रदय द्वारा अनवरत रूप से संपन्न होता रहता है।

हमारा हृदय एक पंप की तरह कार्य करता है और रक्त को रक्त वाहिनी धमनियों और नलिकाओं के द्वारा आगे बढ़ाता रहता है। हृदय के द्वारा रक्त को धमनियों में आगे बढ़ाने की क्रिया को रक्तचाप, खून का दबाव या ब्लड प्रेशर कहते हैं। यह एक स्वाभाविक शारीरिक क्रिया है जिसके बिना हम लोग जीवित नहीं रह सकते हैं।

यह रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) निम्नलिखित परिस्थितियों में बढ़ सकता है

शरीर में जरा सा भी जोश उमंग आने पर, किसी प्रकार की जरा सी घबराहट या भय होने पर, खाना खा लेने के बाद, किसी प्रकार की खुशी होने पर यहां तक कि अत्यधिक खुशी में भी आदमी का रक्तचाप बढ़ कर उसकी धमनियों और रक्त नलिका को तोड़ फोड़ देता है जिससे उसकी मौत तक हो जाती है। दिलचस्प दृश्य देखने से, तेज खुशबू या बदबू से, सुरीली या सख्त आवाज सुनने से, क्रोध आदि अन्य मानसिक आवेगो के द्वारा, स्त्री प्रसंग के समय, ठंडे पानी के नहाने से, क्योंकि ठंडे पानी के प्रभाव से रक्त नलिका सिकुड़ जाती हैं जिसके कारण रक्तचाप बढ़ जाता है।

ब्लड प्रेशर बढ़ जाने से होती हैं यह परेशानियां

परंतु जो लोग कहते हैं कि “हमें ब्लड प्रेशर है” उनका असली मतलब यह होता है कि उनका ब्लड प्रेशर या उच्च रक्त चाप मामूली से अधिक है और स्थाई है । उसके दौरे आते हैं और जो वस्तुतः एक भयानक रोग का रूप धारण कर चुका होता है। यह अवस्था शत-प्रतिशत आना अस्वाभाविक होती है जिसके परिणाम किसी भी समय भयंकर हो सकते हैं। जिनको बढ़े हुए रक्तचाप की बीमारी होती है उनके शरीर में हृदय कमजोर हो जाता है। यह बीमारी अकस्मात नहीं होती अपितु बहुत धीरे-धीरे भयंकर रूप प्रकट करती है।

जब तक शरीर की धमनियों और रक्त नलिकाओं की दशा स्वाभाविक रहती है अर्थात जब तक वह लचीली रहती हैं एवं उनके क्षेत्र पूरी खुले रहते हैं तब तक रक्त को आगे बढ़ाने के लिए हृदय को आवश्यकता से अधिक दबाव डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती और रक्त अपनी स्वभाव चाल से हृदय से निकलकर धमनियों और रक्त नलिकाओं द्वारा शरीर के प्रत्येक भाग में पहुंचता रहता है और उसे पोषण देता रहता है।

जब धमनी और रक्त नलिका के क्षेत्र निम्नलिखित कारणों से सक्रिय पड़ जाते हैं तो रक्त को समुचित संचालन के लिए ह्रदय अस्वाभाविक रूप से अधिक दबाव डालकर वाली उन पतले छिद्र वाली रक्त वाहिनी नलिकाओं में रक्त को भेजना पड़ता है इसके लिए हृदय को काफी मेहनत करनी पड़ती है जिससे वह कमजोर हो जाता है इसे ही हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप कहते हैं।

उच्च रक्तचाप के कारण

चीनी,मैदा, तेल, खटाई, तली भुनी चीजें, प्रोटीन, रबड़ी, मलाई, चाय कॉफी, सिगरेट शराब अधिक मात्रा में सेवन करते हैं। यदि हम बार-बार खाते हैं अधिक खाना खाते हैं। पर्याप्त व्यायाम नहीं करते। चिंता क्रोध भय आदि मानसिक विकारों में बने रहते हैं कब्ज बनी रहती है।

उच्च रक्तचाप को सही करने का तरीका

उच्च रक्तचाप के रोग में औषधियों का प्रयोग बहुत ही हानिकारक साबित होता है अतः इस रोग में भूलकर भी औषधि प्रयोग नहीं करने चाहिए। औषधि द्वारा रक्तचाप की चिकित्सा करना व्यर्थ ही नहीं अपितु इसके कई साइड इफेक्ट्स भी हैं।

इस रोग में अगर हो सके तो कुछ दिनों तक उपवास किया जाए 5 से 10 दिनों तक फलाहार कच्ची सब्जी, उबली सब्जी, अंकुरित अन्न, फल आदि के ऊपर रहा जाए तो बहुत ही अच्छा है। एक टाइम का भोजन यदि सलाद हो तो बहुत ही अच्छा है।

प्रतिदिन 1 घंटे का व्यायाम उच्च रक्तचाप में रामबाण की तरह काम करता है।

ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए

सभी लोगों के लिए सामान्य रक्तचाप 120/80 से कम माना जाता है। लेकिन उम्र के हिसाब से इसमें थोड़ा अंतर रहता है।