क्या आप जिंदगी के फुल मजे नहीं ले पा रहे हो

आजकल लोगों को जीना नहीं आता सब कुछ होते हुए भी आदमी आजकल बहुत परेशान है. आप देख रहे हैं कि कहीं कोई आत्महत्या कर रहा है तो कहीं कोई किसी की हत्या कर रहा है.

अगर उनके कारणों के पीछे जाएं तो कारण भी कोई इतने गंभीर नहीं हैं। बस बात है तो ईर्ष्या जलन की. आदमी के पास में घर है, मकान है, दुकान है, व्यापार है, गाड़ी है, बच्चे हैं, और बहुत सारी सभी सुख-सुविधाएं हैं लेकिन वह इनका कोई मोल नहीं समझ रहा है और एक अंधी रेस में दौड़ लगाए चला जा रहा है.

इस रेस में वह न जाने क्या क्या हासिल करना चाह रहा है लेकिन इसका कोई अंत नहीं है. जब एक इच्छा पूरी हो जाती है तो दूसरी इच्छा जग जाती है जब दूसरी इच्छा पूरी हो जाती है तो तीसरी इच्छा जग जाती है

मैं एक संत के पास गया वो एकदम से खुश और शांत था। काफी देर मेने उनसे बात की। जब वंहा से चलने लगा तो मैने उन्हें 2000 रुपये दिए। उन्होंने कहा इन कागज के टुकड़ों से मेरा कोई लेना देना नही है, आप इनको ले जाइए। मैं दो साल बाद फिर गया और फिर दो हजार रुपये दिए तब भी उन्होंने यही कहा कि मेरा इन कागजों के टुकड़ों से कोई लेना देना नही है। उन्होंने कहा कि तुम दो साल पहले आये थे तब भी मैं खुश था और आज भी।

यह बात सही है कि रुपए आवश्कता की चीज है लेकिन इतनी भी नही कि उसके लिए लोग न जाने क्या क्या कर्म कर रहे हैं। इसलिए आपके पास जो है उसमें खुश रहिये और सही रास्तो से आगे बढ़ते रहिये।

कई बीमारियां जब तक इंसान को घेर लेती हैं

मैंने अपने जीवन में ऐसे बहुत सारे आदमी देखे हैं जिनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है लेकिन वह अपनी सारी शक्ति सारी ऊर्जा और सारे आनंद को पैसा कमाने में लगाएं चले जा रहे हैं. देखते ही देखते उम्र गुजर जाती है फिर कहते हैं यार समय तो यूं ही निकल गया और कई बीमारियां जब तक इंसान को घेर लेती हैं और इंसान उस पैसे का कोई उपयोग कोई आनंद नहीं ले पाता है. वह कमाया हुआ धन बेकार ही चला जाता है.

हमें जब हमारे पास कोई चीज नहीं होती तब उसकी कीमत लगती है। और जब वह चीज हमें मिल जाती है तो उसकी कोई कीमत नहीं रह जाती फिर आगे दूसरी इच्छा हो जाती है. आदमी ऐसे ही अपना सारा समय गुजार देता है न तो वह खुलकर जीवन का आनंद ले पाता है और ना ही सुख से रह पाता है। इस अंधी दौड़ में आज व्यक्ति न जाने क्या क्या कर रहा है और इसी वजह से वह नित्य नए जंजालों में फंसता चला जा रहा है.

इस प्रकार सबसे पहले इंसान को यह आकलन करना चाहिए कि हमारा काम चल रहा है या नहीं अगर चल रहा है तो ठीक और नहीं चल रहा है तो उसे ठीक करने का प्रयास करना चाहिए.

सब समस्याओं का मूल कारण

जीवन में ईर्ष्या जलन दुश्मनी, भलाई- बुराई इन सब चीजों से बचना चाहिए। कोई किसी को अच्छे कपड़े पहन कर देख कर खुश नहीं होता, कोई किसी के अच्छे शरीर को देखकर खुश नहीं होता, कोई किसी के अच्छे पद को देखकर खुश नहीं होता, कोई किसी के अच्छे व्यापार को देखकर खुश नहीं होता, यही सब समस्याओं का मूल कारण बनता जा रहा है.

आए दिन आप अखबारों में पढ़ते होंगे कि आज उसने आत्महत्या कर ली या उसने किसी की हत्या कर दी या किसी का और तरह से नुकसान कर दिया। आदमी इन चीजों में इतना व्यस्त हो गया है कि वह अपने आनंद के बारे में तो सोच ही नहीं पा रहा है.

आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहना चाहिए

यदि कोई कितना भी कमाए हमें उससे क्या, हमें तो अपना देखना चाहिए कि हम कितना कमाते हैं क्या वह हमारे लिए पर्याप्त है या नहीं. कोशिश ऐसी रहनी चाहिए कि जितना है उसमें ही खुश रहकर और जो चल रहा है उसी को आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहना चाहिए.

हम जो भी करते हैं उस से कर्म बनता है और उस कर्म का परिणाम भी निश्चित होता है इसलिए हमें सही कर्म करने चाहिए तो उसके परिणाम सही आएंगे. यदि हम गलत करेंगे तो उसके परिणाम भी निश्चित रूप से गलत आएंगे. यह अटल सत्य है यही गीता का ज्ञान है.